sher

शेर

सूखे पत्तों सा बिखरा है जिस्म मेरा,
सावन को आने में अब भी बहुत देर है|
‘रोहित’
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sher

बड़ी शिद्दत से जला रहा हूँ हयात अपनी,

हवाओं ने आकर काम आसान कर दिया।